Magic Status For Instagram
चलो दिल की अदला बदली कर ले, तड़प क्या होती है खुद समझ जाओगे,,,,,
माना की दुरिया कुछ बढ़ सी गई है, लेकिन तेरे हिस्से का वक्त आज भी तन्हा गुज़रता है ,,,,,
फांसले तो बढ़ा रहे हो मगर ये याद रखना, मोहब्बत बार बार यूँ किसी पर मेहरबान नहीं होती ,,,,,
कोई ढूंढ लाओ उसको, वापस मेरी ज़िन्दगी में, ज़िन्दगी अब साँसे नहीं, उसका साथ मांग रही है ,,,,,
पता नहीं ये बादल क्यूँ भटक रहे है फ़िज़ा में दर-बदर, शायद इनसे भी बात नहीं करता इनका अपना कोई,,,,,
जिस्म उसका भी मिट्टी का है मेरी तरह ए खुदा, फिर क्यू सिर्फ मेरा ही दिल तडपता है उस के लिये ,,,,,
तुम जो होते तो बात कुछ और होती, अब ये बारिश तो सिर्फ पानी है ,,,,,
आ कर ख़यालो में मेरे, बाकि जहाँ बेखयाल कर जाते हो, हमें भी सिखा दो हुन्नर, कैसे यह कमाल कर जाते हो,,,,,
उसके हाथ में टूटे हुए शिशे की तरह हूँ, इतना ही बहुत है की वो बिखरने नही देता ,,,,,
खफ़ा रहने का शौक भी पूरा कर लो तुम, लगता है तुम्हें हम ज़िन्दा अच्छे नहीं लग,,,,,
दिल्लगी में वक़्त-ए-तन्हाई ऐसा भी आता है, की रात चली जाती है मगर अँधेरे नहीं जाते ,,,,,
घुटन सी होने लगी है इश्क़ जताते हुए, मैं खुद से रूठ गया हूँ तुम्हे मनाते हुए,,,,,
तुमने कहा था आँख भर के देख लिया करो मुझे, अब आँख भर आती है पर तुम नज़र नही आते,,,,,
कभी वक्त मिले तो रखना कदम मेरे दिल के आगंन में, हैरान रह जाओगे मेरे दिल में अपना मुकाम देखकर ,,,,,
सिर्फ़ आवाज़ और लफ़्ज ही नहीं, मेरी ख़ामोशी भी तुम्हे बुलाती है,,,,,
दुनिया में आज मुझसे गरीब कोई नहीं, मेरे पास आज तु जो नहीं है,,,,,
महिनो से कैद में हूँ अब रिहाई न दो, जुर्म कबूल है इश्क का इतनी तन्हाई न दो,,,,,
इंतजार किया है तेरा इतना वहाँ की, अब आने जाने वाले वाले हर शख्स की आहटे पहचानता हूँ ,,,,,
छू जाते हो कितनी दफा तुम मुझे ख़्वाब बन कर, ये दुनिया तो यूँ ही कहती है की तुम मेरे करीब नहीं,,,,,
किसी से नाराजगी इतने वक़्त तक न रखो की, वो तुम्हारे बगैर ही जीना सीख जाए,,,,,
आज इतना जहर पिला दो की सांस तक रुक जाए मेरी, सुना है की सांस रुक जाए तो रुठे हुए भी देखने आते है ,,,,,
खुद को मेरे दिल में ही छोड़ गए हो, तुम्हे तो ठीक से बिछड़ना भी नहीं आता,,,,,
तड़प रहे है हम तुम्हारे एक अल्फाज के लिए, तोड़ दो ख़ामोशी मुझे ज़िंदा रखने के लिए,,,,,
तेरे बाद किसी को प्यार से ना देखा हमने, हमे इश्क का शौक है, आवारगी का नही,,,,,
दूरियाँ जब बढ़ी तो गलतफहमियां भी बढ़ गयी, फिर उसने वो भी सुना जो मैंने कहा ही नहीं,,,,,
मेरा और उस चाँद का मुकद्दर एक जैसा है, वो तारों में तन्हा है और मैं यारों में,,,,,
अगर आखिर में जुदाई ही होनी थी तो उसने मिलाया ही क्यों, कभी कभी तो लगता है कही उस उपरवाले को खेलने का शौक तो नही,,,,,
अकेलेपन ने बिगाड़ी है आदते मेरी, तुम लौट आऔ तो मुमकिन है की सुधर जाऊँ मैं ,,,,,
राज झाहिर ना कर दो तो एक बात बताऊ, मैं धीरे धीरे तेरे बिन मर जाऊँगा ,,,,,
एक तुमको ही चाहा था मैंने इस जमाने से लड़कर, और तुमने ही ज़माने से मिलकर मुझे तन्हा कर दिया,,,,,
खुदा का शुक्रिया की ख्वाब बना दिए, वर्ना तुम्हे देखने की हसरत तो अधूरी ही रह जाती,,,,,
रात का अँधेरा पूछ रहा था, कहाँ गयी वो रात भर बात करने वाली ,,,,,
कितना मुश्किल है मनाना उस शख्स को, जो रूठा भी ना हो और बात भी ना करे,,,,,
किसी रोज़ रोशन मेरी भी होगी ज़िंदगी, इंतेज़ार सुबह का नही, किसी के लौट आने का है,,,,,
कितने बेबस है तेरी चाहत में, तुझे खो कर भी अब तक तेरे है,,,,,
ऐ ज़िन्दगी जा ढुंढ, कोई खो गया है मुझ से, अगर वो ना मिला तो तुझे भी अलविदा,,,,,
मोहब्बत आज भी करते है एक दूसरे से, मना वो भी नहीं करते और बयां हम भी नहीं करते,,,,,
कुछ तो खास है जो तुझको मुझसे जोड़े रखता है, वरना इतना माफ़ तो मैंने खुद को भी नहीं किया होगा,,,,,
दिल तो करता है जिंदगी को किसी क़ातिल के हवाले कर दूँ, जुदाई में यूँ रोज़ रोज़ मरना मुझे अच्छा नहीं लगता,,,,,
तुम्हारे बाद मैं जिसका हो गया पगली, उसी का नाम तन्हाई है ,,,,,
हमने कहा था अगर हमको भूल सको तो कमाल होगा, हमने तो सिर्फ बात की थी, तुमने तो कमाल कर डाला,,,,,
बिना उसके दिल का हाल कैसे बतलाऊ, जैसे खाली बस्ता हो किसी नालायक बच्चे का,,,,,
तुम जो कर लो वादा आने का, तो कर लूँ तेरा इन्तज़ार उम्रभर,,,,,
सुनो आँखों के पास नहीं तो न सही कसम से दिल के बहुत पास हो तुम,,,,,
सुनो जान अब तो लौट आओ, या मेरी अर्थी पर आने की कसम खा रखी है,,,,,
हम तो आज भी चाहते है हंमेशा की तरह तुझको, कौन कहता है की फांसलो ने हमारी मोहब्बत कम कर दी,,,,,
ना मेरा दिल बुरा था ना उसमे कोई बुराई थी, सब मुक़द्दर का खेल है बस किस्मत में जुदाई थी,,,,,
थोड़ी थोड़ी ही सही मगर बातें तो किया करो, चुप रहते हो तो भूल जाने का एहसास होता है,,,,,
अकेला रहने पर मजबूर कर दिया उसकी मोहब्बत ने, कभी वक्त था की हमारे बगैर महफ़िल नहीं चलती थी,,,,,
वो मेरे दिल में घर बना के चला गया, ना तो खुद रहता है ना किसी और को रहने देता है ,,,,,
हमारे दरमियाँ कुछ तो रहेगा, चाहे वो फांसला ही सही ,,,,,
एक तेरी तस्वीर है जो मुझसे हज़ारो बाते करती है, एक तुम हो जो हंमेशा गुमसुम से रहते हो,,,,,
उसकी ज़िंदगी में थोड़ी सी जगह माँगी थी मुसाफिरों की तरह,,,,,,
उसने तन्हाईयों का पूरा एक शहर मेरे नाम कर दिया,,,,,