Magic Status For Facebook
क्या कहूँ मैं, कहने को शब्द नहीं मिल रहे, चलो आज खामोशी ही महसूस कर लो,,,,,
कुछ आदतें बदल गई है मेरी आजकल, मैं अब रातों को नींद में नहीं, इंतज़ार में होता हूँ,,,,,
परसी से बड़ा ही खास है मौसम, पर तू नहीं तो तेरे बिन उदास है मौसम,,,,,
तू बात करने का मौका तो दे तेरी कसम, रूला दूंगा तुजे तेरी ही गलतियाँ गिनाते गिनाते ,,,,,
तेरा मुझसे खफा होने का असर कुछ यूँ हुआ मुझ पर, मुझे खुद से ही खफा रहने की आदत सी हो गई,,,,,
एक रात वो गया था जहाँ बात रोक के, अब तक रुका हुआ हूँ वहीं रात रोक के ,,,,,
तुम्हारे बगैर ये वक़्त, ये दिन और ये रात, जान मेरी गुजर तो जाते है मगर गुजारे नहीं जाते ,,,,,
तेरे बाद खुद को इतना तनहा पाया, जैसे लोग हमें दफना के चले गए हो,,,,,
लौट आओ की तुम बिन रोशनी कम है, आँख भीगी नहीं पर हँसी नम है,,,,,
इतनी तो तेरी सूरत भी नहीं देखी मैने, जितना तेरे इंतज़ार में घड़ी देखी है,,,,,
इतने कहाँ मशरूफ़ हो गए हो तुम, आजकल दिल तोड़ने भी नहीं आते,,,,,
जब मिली होगी उसे मेरी हालत की खबर, उसने आहिस्ता से दिवार को जरूर थामा होगा ,,,,,
छोड़ दो मुड़कर देखना उनको, जो तुमसे दूर जाया करते है, जिनको साथ नहीं चलना होता, वो अक्सर रूठ जाया करते है,,,,,
तमाम नींदे गिरवी है हमारी उसके पास, जिससे ज़रा सी मोहब्बत की थी हमने ,,,,,
तूने फैसले ही फासले बढाने वाले किये थे, वरना कोई नहीं था, तुजसे ज्यादा करीब मेरे,,,,,
क्या गलतियां की हमने कभी नहीं बताया उन्होने, बस प्यार घटता गया और फांसले बढ़ते गए,,,,,
जरुरत मुजे तेरी आज भी है पर कहते है ना की, मोहब्बत भी जरूरी थी और बिछड़ना भी जरूरी था ,,,,,
अनदेखे धागों में यूं बाँध गया कोई, की वो साथ भी नहीं और हम आज़ाद भी नहीं,,,,,
बारिश के बाद तार पर टंगी आख़री बूंद से पूछना, क्या होता है अकेलापन,,,,,
और तो सब कुछ ठीक है लेकिन कभी कभी यूँ ही, चलता फिरता शहर अचानक तन्हा तन्हा लगता है,,,,,
क्यूँ तुझको मनाने को तेरे पाँव पढूँ, मुझे मोहब्बत है तुझसे, कोई मतलब तो नही,,,,,
करीब आने की ख्वाहिशें तो बहुत थी मगर, करीब आकर पता चला की मोहब्ब्त तो फासलों में है,,,,,
हम तो बिछड़े थे तुमको अपना एहसास दिलाने के लिए, लेकिन तुमने तो मेरे बिना जीना ही सीख लिया,,,,,
अच्छा ही किया तुमने आने का वादा तोड़ के, जो आ जाते तुम तो पंख पसार लेती नादां तमन्नाऐ ,,,,,
एक ठहरा हुआ खयाल तेरा, न जाने कीतने लम्हों को रफ्तार देता है,,,,,
जब हो थोड़ी फुर्सत मन की बात कह देना, बहुत खामोश रिश्ते कभी जिंदा नहीं रहते ,,,,,
शाम कबकी ढल चुकी है इन्तज़ार में, अब भी अगर आ जाओ तो ये रात बहुत है,,,,,
दूर बैठ रहोगे, पास न आओगे कभी, ऐसे रूठोगे तो जान ले जाओगे कभी ,,,,,
वो जाते जाते कह गया की अब हम सिर्फ ख्वाबों में आयेंगे, हम ने कहा वादा तो करो, हम जिन्दगी भर के लिये सो जायेंगे,,,,,
वो मुझसे दूर रहकर खुश है तो रहने दो, मुझे चाहत से ज्यादा उसकी मुस्कुराहट पसंद है,,,,,
मेरी तन्हाई मार डालेगी दे दे कर तानें मुझको, एक बार आ जाओ और इसे तुम खामोश कर दो,,,,,
ऐ उजाले अपनी रोशनी को हमारे पास रहने दो, ना जाने किस गली में जिन्दगी की शाम हो जाऐ ,,,,,
वो रोया तो बहुत होगा खाली कागज़ देख कर, ज़िन्दगी कैसी बीत रही है, उसने पूछा था ख़त में,,,,,
छु जाते हो तुम मुझे हर रोज एक नया ख्वाब बनकर, ये दुनिया तो खामखा कहती है की तुम मेरे करीब नहीं,,,,,
कोई बतलाओ की एक उम्र का बिछड़ा महबूब, इत्तेफ़ाक़न कहीं मिल जाये तो क्या कहते है ,,,,,
होते नहीं तबादले मोहब्बत करने वालो के, वो आधी रात को भी तन्हाई में तैनात मिला करते है ,,,,,
गिरा दे जितना पानी है तेरे पास ए बादल, ये प्यास किसी के मिलने से ही बुझेगी तेरे बरसने से नहीं,,,,,
अब लौट कर मत आना टुट चुका है वो, जो कभी तुम्हे टुटकर चाहा करता था,,,,,
किस बात पे रूठा है पता चले तो मनाऊं उसे, वो रूठ तो जाता है लेकिन शिकायत नहीं करता,,,,,
जुदा हो के भी दोनों जी ही रहे है, कभी दोनों कहते थे की ऐसा हो नहीं सकता,,,,,
नींद आए या ना आए, चिराग बुझा दिया करो, यूँ रात भर किसी का जलना, हमसे देखा नहीं जाता ,,,,,
मैं क्यों कहूँ उससे की मुझसे बात करो, क्या उसे नहीं मालूम की उसके बिना मेरा दिल नहीं लगता,,,,,
छूप छूप कर तेरी सारी तस्वीरें देखता हूँ, बेशक तू खूबसूरत आज भी है, पर चेहरे पर वो मुस्कान नहीं है जो मैं लाया करता था ,,,,,
दीवाने लोग मेरी कलम चूम रहे है, तुम मेरी शायरी में वो असर छोड़ गई हो ,,,,,
लौट आ के मिलते है, फिर से अजनबी की तरह, तुम हमारा नाम पूछ लो और हम तुम्हारा हाल पूछते है,,,,,
लौट आ तू किसी भी बहाने से, अकेला दिल डर रहा है जमाने से ,,,,,
मेरी नींद भी मेरी दुश्मन हो गयी, ख्वाबो में भी मुझे तुमसे मिलने नहीं देती,,,,,
कौन कहता है की वो मुझसे बिछड़ कर खुश है, बस एक बार उसके सामने मेरा नाम लेकर तो देखो,,,,,
गरूर तो मुझमे भी था कहीं ज्यादा, मगर सब टुट गया तेरे रूठने के बाद,,,,,
मुद्दतों बाद उसने पूछ ही लिया की क्या चल रहा है आज कल, मैंने भी बेफ़िक्री से कह दिया की सांसे,,,,,
अभी कदम रखा ही था हमने मयखाने में की आवाज आई, चला जा वापस क्यूंकि तुझे शराब की नहीं, किसीके दीदार की जरुरत ,,,,,
टकरा जाता हूँ अक्सर मैं तेरे साये से, तुम जब दिखते नही हो तो महसूस क्यों होते हो मुझे ,,,,,
रुठुगा अगर तुजसे तो इस कदर रुठुगा की, ये तेरी आँखे मेरी एक झलक को तरसेंगी,,,,,
मेरी तन्हाई मार डालेगी दे दे कर तानें मुझको, एक बार आ जाओ इसे तुम खामोश कर दो,,,,,
फांसले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा न था, सामने बैठी थी मेरे पर वो मेरी न थी,,,,,
सुना है लोग जहाँ खो जाते है वहीं मिल भी जाते है, मैं आज भी अक्सर तुझे खुद में तलाश करता हूँ,,,,,